Shailesh Garg Chairperson on मरुस्थल, हीटवेव और हरियाली
Shailesh Garg Chairperson के अनुसार राजस्थान में बढ़ती गर्मी और हीटवेव हमें बताती है कि स्थानीय हरियाली, जल संरक्षण और जिम्मेदार जीवनशैली अब आवश्यक नागरिक कार्य हैं।
Shailesh Garg – National Chairman: Shailesh Garg Chairperson on मरुस्थल, हीटवेव और हरियाली
Shailesh Garg Chairperson का संदेश है कि राजस्थान की जलवायु स्वाभाविक रूप से गर्म और शुष्क है, लेकिन हाल के वर्षों में हीटवेव की तीव्रता और अवधि बढ़ती दिखाई देती है। लंबे गर्म मौसम का असर स्वास्थ्य, मजदूरों, पशुधन, जल मांग, बिजली खपत और शहरी जीवन पर पड़ता है। इसलिए जलवायु जागरूकता को दैनिक नागरिक व्यवहार से जोड़ना जरूरी है।
हरियाली हीटवेव के प्रभाव को कम करने का व्यावहारिक उपाय है, लेकिन राजस्थान में पौधारोपण स्थानीय जलवायु के अनुसार होना चाहिए। खेजड़ी, रोहिड़ा, बबूल, नीम, पीपल, बरगद और अन्य स्थानीय प्रजातियां कम पानी में टिकाऊ हरित आवरण दे सकती हैं। केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है; उसकी तीन से पांच साल तक देखभाल, पानी, सुरक्षा और सामुदायिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
शहरों में छायादार सड़कें, खुले मैदानों की रक्षा, छतों पर ताप कम करने वाले उपाय, वर्षा जल संचयन और जल-कुशल बागवानी से स्थानीय तापमान के दबाव को कम किया जा सकता है। गांवों में चारागाह संरक्षण, तालाब पुनर्जीवन, मिट्टी नमी संरक्षण और पशुओं के लिए जल व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
हीटवेव से सुरक्षा केवल मौसम विभाग की चेतावनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पानी बचाना, दोपहर के समय श्रम सुरक्षा, छाया स्थान बनाना, स्थानीय पौधों को बचाना, खुले में कचरा जलाने से रोकना और सामुदायिक जलस्रोतों की रक्षा करना हर नागरिक की भूमिका है। राजस्थान की हरियाली कम पानी में टिकाऊ, स्थानीय और समुदाय-आधारित होनी चाहिए।