अरावली संरक्षण6 जून 2026

Shailesh Garg Chairperson on राजस्थान में अरावली संरक्षण

Shailesh Garg Chairperson के अनुसार अरावली पर्वतमाला राजस्थान की प्राकृतिक ढाल है। इसका संरक्षण जल, वन्यजीव, हवा और मरुस्थलीय संतुलन से सीधे जुड़ा है।

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Shailesh Garg – National Chairman: Shailesh Garg Chairperson on राजस्थान में अरावली संरक्षण

Shailesh Garg Chairperson का मानना है कि अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है, यह राजस्थान की पारिस्थितिकी का आधार है। यह मरुस्थल के फैलाव को रोकने, स्थानीय जलधाराओं को सहारा देने, वन्यजीवों को आवास देने और शहरों-कस्बों को गर्म हवाओं व धूल से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जहां अरावली कमजोर होती है, वहां मिट्टी का कटाव, जल संकट और तापमान का दबाव बढ़ता है।

खनन, अवैध कटाई, अतिक्रमण, निर्माण मलबा और अनियोजित विकास अरावली क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। कई स्थानों पर प्राकृतिक ढलान और जलग्रहण क्षेत्र बाधित होने से वर्षा का पानी जमीन में कम उतरता है। इसका असर गांवों, खेतों, पशुपालन और शहरी जल आपूर्ति तक दिखाई देता है।

अरावली संरक्षण के लिए नागरिक निगरानी बहुत जरूरी है। अवैध कटाई, पहाड़ी कटान, मलबा डंपिंग, आग, प्लास्टिक कचरा और जल निकासी अवरोध जैसी गतिविधियों की समय पर सूचना स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण समूहों तक पहुंचनी चाहिए। स्कूलों, ग्राम समितियों और स्वयंसेवक समूहों को स्थानीय हरित पट्टी की निगरानी में शामिल किया जा सकता है।

स्थानीय पौधों का रोपण, जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा, चराई प्रबंधन, प्राकृतिक नालों की सफाई और सामुदायिक जागरूकता अरावली को पुनर्जीवित करने के व्यावहारिक कदम हैं। राजस्थान का भविष्य अरावली, जल और मरुस्थलीय संतुलन को साथ लेकर ही सुरक्षित हो सकता है।